नैनीताल : टू-व्हीलर को ₹200 और फोर-व्हीलर को ₹500 तक ही तेल, पंप प्रबंधन ने तकनीकी खराबी बताई वजह

नैनीताल:

उत्तराखंड की सरोवर नगरी Nainital इन दिनों सिर्फ पर्यटन सीजन की रौनक को लेकर ही नहीं, बल्कि पेट्रोल-डीजल की सीमित सप्लाई को लेकर भी चर्चा में है। शहर के प्रमुख पेट्रोल पंपों पर वाहनों को सीमित मात्रा में तेल दिए जाने की खबरों ने स्थानीय लोगों, टैक्सी चालकों और पर्यटकों की चिंता बढ़ा दी है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि मल्लीताल क्षेत्र स्थित सूखाताल पेट्रोल पंप पर दोपहिया वाहनों को केवल ₹200 तक का पेट्रोल दिया जा रहा है, जबकि टैक्सी और अन्य फोर-व्हीलर वाहनों के लिए ₹500 तक की सीमा तय की गई है। पर्यटन सीजन के दौरान इस व्यवस्था से वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

पर्यटन सीजन में बढ़ी खपत

इन दिनों नैनीताल में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिसके चलते पेट्रोल और डीजल की खपत तेजी से बढ़ गई है। स्थानीय टैक्सी चालकों का कहना है कि सीमित ईंधन मिलने से लंबी दूरी की यात्राएं प्रभावित हो रही हैं और कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।

टैक्सी चालक आशीष के अनुसार, पिछले 15–20 दिनों से लगातार सीमित मात्रा में तेल मिलने के कारण यात्रियों को लेकर परेशानी हो रही है। वहीं टैक्सी चालक फरमान ने कहा कि पर्यटन सीजन के सबसे व्यस्त समय में इस तरह की पाबंदी से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

तकनीकी खराबी बनी वजह?

सूखाताल पेट्रोल पंप प्रबंधन का कहना है कि हाल ही में पंप पर निर्माण कार्य के बाद एक टैंक में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके चलते सप्लाई सीमित करनी पड़ी। हालांकि स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि सिर्फ एक टैंक में समस्या है तो अन्य टैंकों और अन्य पंपों पर भी सीमित सप्लाई क्यों की जा रही है।

रोजाना 12 हजार लीटर सप्लाई

पंप प्रबंधन के मुताबिक, फिलहाल रोजाना करीब 12 हजार लीटर ईंधन की सप्लाई हो रही है, जिसमें लगभग 6000 लीटर पेट्रोल और 6000 लीटर डीजल शामिल है। प्रबंधन ने दावा किया कि शहर में किसी प्रकार की ईंधन कमी नहीं है और आवश्यक सेवाओं जैसे एंबुलेंस व फायर ब्रिगेड को पूरी मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है।

लोगों ने उठाए सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समस्या पिछले कई दिनों से बनी हुई है तो पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले मरम्मत कार्य पूरा क्यों नहीं किया गया। वहीं डीजल सप्लाई सीमित किए जाने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

पर्यटन सीजन के बीच ईंधन सप्लाई पर लगी इस सीमा ने अब प्रशासन और पेट्रोल पंप प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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