नई दिल्ली। एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन लेकर रहने वाले लाखों लोगों को जल्द बड़ी राहत मिल सकती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत किसी वाहन को दूसरे राज्य में बिना री-रजिस्ट्रेशन के रखने की अवधि मौजूदा एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की ‘ईज ऑफ लिविंग’ पहल के तहत तैयार किए गए ड्राफ्ट संशोधन का हिस्सा है। हाल ही में इस पर अनौपचारिक मंत्रियों के समूह (iGoM) की बैठक में भी चर्चा की गई।
फिलहाल क्या है नियम?
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार मोटर वाहन अधिनियम की धारा-47 के तहत यदि कोई वाहन किसी दूसरे राज्य में 12 महीने से अधिक समय तक रहता है, तो उसका स्थानीय स्तर पर री-रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है। प्रस्तावित संशोधन के बाद यह अवधि बढ़कर तीन वर्ष हो जाएगी।
किन लोगों को होगा सबसे अधिक लाभ?
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से ऐसे लोगों को राहत मिलेगी जिनका कार्यस्थल बार-बार बदलता है। इनमें—
- सरकारी एवं निजी क्षेत्र के कर्मचारी
- लंबी अवधि के प्रोजेक्ट पर कार्यरत पेशेवर
- दूसरे राज्यों में पढ़ाई करने वाले छात्र
- अस्थायी रूप से दूसरे राज्य में रहने वाले परिवार
सबसे अधिक लाभान्वित होंगे। इससे बार-बार री-रजिस्ट्रेशन और उसे रद्द कराने जैसी जटिल प्रक्रियाओं से मुक्ति मिलेगी।
BH सीरीज को भी मिलेगा बढ़ावा
अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित संशोधन भारत (BH) सीरीज वाहन पंजीकरण व्यवस्था को भी मजबूत करेगा। BH सीरीज के तहत पात्र वाहन मालिक बिना नए पंजीकरण के विभिन्न राज्यों में वाहन का उपयोग कर सकते हैं। नया प्रस्ताव इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में माना जा रहा है।
विशेषज्ञ बोले- दोहरे कराधान का समाधान भी जरूरी
हालांकि उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल समय सीमा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उपभोक्ता संरक्षण विशेषज्ञ बेजोन कुमार मिश्रा के अनुसार वाहन मालिकों की सबसे बड़ी समस्या दोहरे रोड टैक्स की है, जिसका समाधान भी सरकार को करना चाहिए।
पूर्व परिवहन अधिकारी ने किया स्वागत
दिल्ली परिवहन विभाग के पूर्व उप आयुक्त अनिल छिकारा ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान एक वर्ष की सीमा के कारण हजारों लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में समय सीमा पूरी होने पर वाहन मालिकों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है, जबकि वे पहले ही रोड टैक्स चुका चुके होते हैं।
ट्रांसपोर्ट उद्योग की मांग- खत्म हो री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहा कि देशभर में वाहनों के निर्बाध संचालन के लिए री-रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त कर दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि एक बार वाहन का पंजीकरण और टैक्स जमा होने के बाद उसे पूरे देश में बिना अतिरिक्त औपचारिकताओं के चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए।
डिजिटल व्यवस्था को भी मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित संशोधनों में राज्यों को छह माह के भीतर निर्णय देने वाली सक्षम प्राधिकरण नियुक्त करने और जुर्माने के निस्तारण के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम विकसित करने का भी प्रावधान शामिल है। इससे प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और डिजिटल होंगी।
लाखों वाहन मालिकों को मिलेगी राहत
यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है तो देशभर में नौकरी, शिक्षा और व्यवसाय के सिलसिले में दूसरे राज्यों में रहने वाले लाखों वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही कागजी कार्रवाई कम होगी, समय की बचत होगी और वाहन पंजीकरण प्रणाली अधिक सरल एवं सुविधाजनक बन सकेगी।


