नेपाल बॉर्डर से अवैध एंट्री, दिल्ली में बना फर्जी पहचान का जाल, पहले भी गिरफ्तारी के बाद देश नहीं लौटी थी एक आरोपी
1 पासपोर्ट, 3 आधार कार्ड, 2 पैन कार्ड, 2 बैंक पासबुक (SBI), 7 मोबाइल फोन, विदेशी मुद्रा के नोट बरामद
देहरादून | राजधानी देहरादून में पुलिस के “ऑपरेशन क्रैकडाउन” के तहत बड़ा खुलासा हुआ है। रायपुर क्षेत्र में एक फ्लैट से तीन विदेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया गया, जो फर्जी भारतीय दस्तावेजों के सहारे अवैध रूप से रह रही थीं। इस कार्रवाई ने न सिर्फ अवैध प्रवास बल्कि फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार, जिलेभर में चलाए जा रहे सत्यापन अभियान के दौरान 28 मार्च को रायपुर स्थित सांई कॉम्प्लेक्स के तीसरे तल पर एक फ्लैट में छापेमारी की गई। यहां तीन महिलाएं संदिग्ध परिस्थितियों में पाई गईं। दस्तावेज मांगने पर वे कोई वैध प्रमाण नहीं दिखा सकीं, जिसके बाद तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।
पूछताछ में महिलाओं ने अपनी पहचान ईरीका (29 वर्ष, किर्गिस्तान), करीना (30 वर्ष, उज्बेकिस्तान) और निगोरा नीम (32 वर्ष, उज्बेकिस्तान) के रूप में बताई। तलाशी के दौरान उनके पास से पासपोर्ट, कई आधार कार्ड, पैन कार्ड, एसबीआई पासबुक, सात मोबाइल फोन और विदेशी मुद्रा बरामद हुई। प्रारंभिक जांच में अधिकांश दस्तावेज फर्जी या संदिग्ध पाए गए हैं।
जांच में सामने आया कि ईरीका 2023 में वीजा पर भारत आई थी, लेकिन अवधि खत्म होने के बाद भी देश नहीं लौटी। वहीं, करीना और निगोरा नेपाल बॉर्डर के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थीं। बाद में दिल्ली में तीनों की मुलाकात हुई, जहां इनके परिचितों की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि ईरीका को पहले भी बिहार में फर्जी दस्तावेजों के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन जमानत मिलने के बाद भी वह वापस अपने देश नहीं गई और दोबारा भारत में अवैध रूप से रहने लगी।
रायपुर थाना पुलिस ने तीनों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं और इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन लोगों और गिरोह की तलाश में जुट गई है, जो विदेशी नागरिकों को फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज उपलब्ध करा रहे हैं।







