
रुद्रप्रयाग। पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजित भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस पावन अवसर पर मंदिर को करीब आठ कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। कपाट बंद होने से पूर्व बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
समुद्रतल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ धाम में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया था। मंदिर के पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने विधिवत पूजा-अर्चना एवं पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। इसके बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हुई।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उत्सव डोली शुक्रवार को चोपता में रात्रि प्रवास करेगी। सात नवंबर को डोली भनकुंड पहुंचेगी, जबकि आठ नवंबर को मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर में विराजमान होगी। शीतकाल के दौरान भगवान तुंगनाथ की नियमित पूजा-अर्चना मक्कूमठ में ही संपन्न होगी।
कपाट बंद होने के इस धार्मिक एवं पावन अवसर पर पुजारी अभिषेक मैठाणी, कोतवाली ऊखीमठ के प्रभारी निरीक्षक मनोज नेगी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।






