
SARRA के तहत शुरू हुआ छह महीने का शोध, 80 किलोमीटर के दायरे में 36 स्थानों पर होगा सर्वे; खनन, शहरीकरण और प्रस्तावित सोंग बांध के प्रभावों का भी होगा अध्ययन
देहरादून। पूर्वी देहरादून की प्रमुख जीवनरेखा मानी जाने वाली सोंग नदी के संरक्षण और उसकी पारिस्थितिकी को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA), उत्तराखंड के तहत सोंग नदी क्षेत्र में ‘बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की गई है। इस परियोजना के माध्यम से नदी के जल की गुणवत्ता, जलीय जीवों, नदी तट के प्राकृतिक आवास और मानवीय गतिविधियों से पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।
इस छह महीने की परियोजना का मार्गदर्शन भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. वी.पी. उनियाल करेंगे। अध्ययन में जैविक संकेतकों यानी बायो इंडिकेटर्स की मदद से नदी के वास्तविक पारिस्थितिक स्वास्थ्य का आकलन किया जाएगा।

पांच प्रमुख जीव समूहों से होगी नदी की निगरानी
परियोजना के तहत पांच प्रमुख जैविक समूहों का अध्ययन किया जाएगा। इनमें जलीय मैक्रोइनवर्टेब्रेट्स यानी पानी में पाए जाने वाले छोटे जीव और उनके लार्वा शामिल हैं, जो जल की गुणवत्ता में बदलाव के प्रति संवेदनशील होते हैं।

इसके अलावा तितलियों और जंगली मधुमक्खियों के जरिए नदी किनारे की हरियाली और परागण की स्थिति का पता लगाया जाएगा। ड्रैगनफ्लाई और डेम्सलफ्लाई की प्रजातियां पानी की स्वच्छता और नदी तट के आवास की स्थिति समझने में मदद करेंगी। वहीं, विभिन्न पक्षी प्रजातियों का अध्ययन पूरी नदी घाटी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य की जानकारी देगा।
80 किलोमीटर क्षेत्र में 36 स्थानों पर होगा सर्वे
शोध का दायरा सोंग नदी के उद्गम स्थल कद्दूखाल, टिहरी से लेकर देहरादून के तेहरी फार्म स्थित गंगा संगम तक फैला होगा। लगभग 80 किलोमीटर लंबे नदी क्षेत्र को अध्ययन के लिए तीन हिस्सों में बांटा गया है।
इनमें ऊपरी (अपर), मध्य (मिडिल) और निचला (लोअर) क्षेत्र शामिल हैं। प्रत्येक क्षेत्र में 12 स्थायी सैंपलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इस तरह कुल 36 स्थानों पर नियमित रूप से सर्वे और जैविक नमूनों का अध्ययन किया जाएगा।
मानसून के बाद और पहले होगा अध्ययन
परियोजना के तहत नवंबर से अप्रैल के बीच दो अलग-अलग चरणों में फील्ड सर्वे किया जाएगा। पहला चरण मानसून के बाद (पोस्ट मॉनसून) और दूसरा मानसून से पहले (प्री मॉनसून) का होगा। दोनों चरणों के आंकड़ों की तुलना कर नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को समझने का प्रयास किया जाएगा।
सोंग बांध और शहरीकरण के प्रभावों का भी होगा आकलन
इस परियोजना से सोंग नदी का एक व्यापक वैज्ञानिक डेटाबेस और बेसलाइन तैयार होगा। इसके जरिए नदी पर खनन, बढ़ते शहरीकरण और प्रस्तावित सोंग बांध के संभावित प्रभावों का आकलन करने में मदद मिलेगी।
अध्ययन से मिलने वाले निष्कर्ष नदी के संरक्षण, जैव विविधता को बनाए रखने और जल गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी नीतियां तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। पूर्वी दून घाटी की पारिस्थितिकी के लिहाज से इस परियोजना को सोंग नदी के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।





