उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य है जो तैयार कर रहा है जीईपी

देहरादून– उत्तराखंड ने जीईपी (सकल पर्यावरण उत्पाद) की ओर अपने कदम बढ़ा लिया है। उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य है जो जीईपी तैयार कर रहा है। जीईपी क्या होगी और किस तरह की होगी, यह डब्ल्यूआरआई (वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट), भारतीय वन्यजीव संस्थान व वाडिया आदि के सहयोग से तय होगा। प्रदेश का नियोजन विभाग इसमें उनकी मदद करेगा। इसके साथ ही इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रमुख सचिव वन आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में कमेटी का गठन भी किया गया है। जीईपी के लक्ष्य तय करने, सुझाव देने, दायित्व आदि के आधार पर आधार पत्र (कांसेप्ट नोट) तैयार कर प्रमुख सचिव वन आनंद वर्द्धन को सौंपा जाएगा। प्रमुख सचिव वन की अध्यक्षता में संचालन समिति का गठन भी किया गया है। इस समिति में अपर सचिव वन सुभाष चंद्र के साथ ही सभी संबंधित विभागों के अध्यक्ष भी शामिल हैं। उत्तराखंड में इस काम के समन्वय के लिए नियोजन विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। जीईपी में नीरी और एफआरआई सहित अन्य संस्थान भी सहयोग करेंगे।

जीईपी में इनका होगा आकलन

जंगल – वन आवरण, वन क्षेत्र, नया पौधरोपण, पौधों के जीवित रहने की दर, जैव विविधता, वन उपज।

पानी – प्रदूषण, पानी की मात्रा, कितना पानी रिचार्ज किया गया, बारिश का पानी कितना बचाया गया, भूजल, प्राकृतिक जल स्रोतों को कितना रिचार्ज किया गया।

हवा – प्रदूषण कितना कम हुआ, हवा की गुणवत्ता, हवा में पीएम 10, पीएम 5 आदि सूक्ष्म कणों की मात्रा आदि।

मिट्टी – कितने हानिकारक तत्व कम हुए, मिट्टी की गुणवत्ता, सतह की मिट्टी की गुणवत्ता और गहराई, वन भूमि की मिट्टी की गुणवत्ता।

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