विधानसभा सत्र में हुआ अम्ब्रेला एक्ट पास, 1973 के बाद पहली बार हुआ ऐसा

उत्तराखंड : बुधवार को आयोजित विधानसभा के मानसून सत्र में अम्ब्रेला एक्ट पास किया गया। अब सभी विश्वविद्यालयों में एक जैसे नियम लागू होंगे। मीडिया से बात करते दौरान उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि साल 1973 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब विश्वविद्यालयों के लिए अलग से एक एकीकृत एक्ट लाया गया है।
विधानसभा सत्र में अम्ब्रेला एक्ट पास होने पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रदेश कैबिनेट के सहयोगियों सहित बाकी विधानसभा सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी राज्य विश्वविद्यालय अपने अलग-अलग अधिनियमों से संचालित हो रहे हैं। इस वजह से विश्वविद्यालयों के संचालन में प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था करने में एकरूपता नहीं आ रही थी। अब अम्ब्रेला एक्ट के आने से राज्य के समस्त राज्य के विश्वविद्यालयों में एक समान स्वायत्त एवं उत्तरदायी प्रशासन की स्थापना हो सकेगी।
आगे उन्होंने बताया कि अम्ब्रेला एक्ट के तहत विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति में नई व्यवस्था की गई है। अब कुलपति तीन साल की अवधि या 70 वर्ष की आयु तक पद पर नियुक्ति पा सकेंगे। नए नियमों के तहत कुलपति को अधिकतम एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया जा सकेगा।
इसके अलावा कुलपति चयन समिति में पांच सदस्य होंगे, इससे पहले तीन सदस्यों का प्रावधन था। कुलसचिव की नियक्ति की प्रक्रिया एवं सेवा शर्तों में भी कुछ बदलाव किया गया है। यूजीसी मानकों के तहत 50 फीसदी पद विभागीय पदोन्नति से जबकि 50 फीसदी सीधी भर्ती से भरे जाएंगे। बाकी सेवा शर्तें राज्य सरकार के अनुसार होंगी। इसके अलावा विश्वविद्यालय के अन्य प्राधिकारियों के चयन एवं अन्य सेवा शर्तों का भी अंब्रेला एक्ट में उपबंध किया गया है।

70 की उम्र के बाद कोई व्यक्ति नहीं बनेगा कुलपति
विधानसभा में हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय संशोधित अधिनियम 2020 को मंजूरी दी गई। इसमें कहा गया है कि 70 वर्ष से अधिक आयु के किसी व्यक्ति को कुलपति के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा।
साथ ही 70 की उम्र से पहले व्यक्ति जो पद धारण करेगा, वह फिर से नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। इसे बुरे व्यवहार या किसी अन्य कारण से कुलाधिपति के द्वारा पारित आदेश से सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के कार्यरत या रिटायर न्यायाधीश की जांच के बाद हटाया जा सकेगा।

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