फांसी की सजा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा अंतहीन मुकदमेबाजी की इजाजत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा के मामले में गुरुवार को अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि फांसी की सजा में फाइनेलिटी (सजा का अंतिम होना) बेहद जरूरी है। दोषी को यह नहीं समझना चाहिए कि वह इस पर कभी भी सवाल उठा सकता है। अंतहीन मुकदमेबाजी की इजाजत नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने ये टिप्पणी फांसी की सजा पाए अमरोहा कांड के दोषी शबनम और सलीम की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं। कोर्ट ने दोनों दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर बहस सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

भले ही कोर्ट ने टिप्पणी अमरोहा कांड के दोषियों को मामले में सुनवाई के दौरान की हो लेकिन दिल्ली दुष्कर्म कांड के दोषियों के मृत्युदंड टालने के लिए अपनाए जा रहे रवैये को देखते हुए टिप्पणी महत्वपूर्ण हो जाती है। दिल्ली दुष्कर्म कांड के मामले में कुल चार दोषी हैं जिन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है और निचली अदालत उन्हें फांसी देने के लिए एक फरवरी की तिथि भी तय कर चुकी है लेकिन दोषी मामले में देरी करने के लिए एक एक कर अर्जी दाखिल कर रहे हैं। कुख्यात रंगा- बिल्ला, उजागर-करतार सिंह, मकबूल भट्ट समेत कई मामलों में फांसी को टालने के लिए कोई न कोई तरीका अपनाया जाता रहा है।

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