सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता कानून पर रोक लगाने से किया इंकार, सरकार से मांगा जवाब

नागरिकता संशोधन कानून, 2019 के खिलाफ कोर्ट में चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस क़ानून पर रोक लगाने से साफ़ इनकार कर दिया है। वहीं, नागरिकता कानून को लेकर भारत में विरोध और भी तेज हो गया है असम, शिलोंग में विरोध काम हुआ तो पश्चिम बंगाल में पांचवें दिन भी सड़क और रेल यातायात को रोककर प्रदर्शनों का दौर जारी रहा।

केरल में संगठन इसके सड़कों पर सरकारी बसों को तोडा और फोड़ा गया है। पुलिस वहां 200 से अधिक लोगों को जेल भेज चुकी है। दिल्ली में भी कानून को जोरदार विरोध की आग फ़ैल गई है। ऐसे में कोर्ट की तरफ से आया फैसला काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।

आज सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की खंडपीठ ने नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को लागू करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि वह जनवरी में याचिका पर सुनवाई करेगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। समाचार एजेंसी एएनआइ ने इस मामले में जानकारी दी है।

बता दें की संशोधित कानून के अनुसार धार्मिक प्रताड़ना के चलते 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने गुरुवार की रात नागरिकता संशोधन बिल 2019 को स्वीकृति प्रदान कर दी थी जिससे यह कानून बन गया था। इस क़ानून के खिलाफ कांग्रेस, त्रिपुरा राज परिवार के वंशज प्रद्योत किशोर देव बर्मन और असम गण परिषद समेत कई इकाईयों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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