रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर पर पुनर्विचार जरूरी

रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर पर पुनर्विचार जरूरी

देहरादून। प्रस्तावित रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर (RBEC) परियोजना पर पुनर्विचार की जरूरत बताते हुए शहरी मोबिलिटी विशेषज्ञ अमित बघेल ने कहा कि एलिवेटेड सड़कें ट्रैफिक जाम को कम नहीं करतीं, बल्कि लंबे समय में समस्या को और गंभीर बना देती हैं।

देहरादून सिटीजन फोरम (DCF) द्वारा आयोजित रिस्पना–बिंदाल नॉलेज सीरीज़ (भाग–2) में ऑनलाइन संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि टियर–2 शहरों की वास्तविक जरूरत मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, सुरक्षित फुटपाथ और पैदल चलने योग्य सड़कें हैं, न कि महंगी एलिवेटेड परियोजनाएं।

अमित बघेल ने स्पष्ट किया कि लोग यह तय नहीं करते कि वे पैदल चलेंगे या वाहन से जाएंगे, बल्कि शहर की सड़क संरचना उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर करती है। जहां फुटपाथ और सार्वजनिक परिवहन नहीं होते, वहां लोग निजी वाहनों पर निर्भर हो जाते हैं। चौड़ी सड़कें और एलिवेटेड रोड अधिक वाहनों को आकर्षित करती हैं, जिससे कुछ समय बाद वे भी जाम हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को इंड्यूस्ड डिमांड कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि एलिवेटेड रोड पर चलने वाले वाहन अंततः नीचे उतरते ही हैं, जिससे एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर भारी जाम की स्थिति बनती है। अब तक कोई भी शहर इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं खोज पाया है।

नदियों के ऊपर एलिवेटेड सड़क निर्माण पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इससे न केवल पर्यावरण और नदी तंत्र को नुकसान पहुंचता है, बल्कि आसपास के रिहायशी इलाकों, फुटपाथों और स्थानीय सड़कों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अमित बघेल ने जोर दिया कि देहरादून जैसे शहर में छोटी दूरी की यात्राओं के लिए पैदल चलना और साइकिल सबसे बेहतर विकल्प हैं, लेकिन फुटपाथों की कमी लोगों को वाहन इस्तेमाल करने पर मजबूर कर रही है। वर्तमान में शहर में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी मात्र 6 प्रतिशत है, जिसे बेहतर सेवाओं के जरिए बढ़ाया जा सकता है।

देहरादून की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यहां मेट्रो जैसी परियोजनाएं व्यावहारिक नहीं हैं। उन्होंने 2019 में बने और 2024 में अपडेट हुए देहरादून कम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें कई अच्छे सुझाव शामिल हैं, लेकिन सवाल यह है कि उनमें से कितने वास्तव में लागू किए जाएंगे।

उन्होंने मांग की कि यदि रिस्पना–बिंदाल पर एलिवेटेड रोड बनाई जाती है, तो उसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखी जानी चाहिए। नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि यह परियोजना शहर की पहचान और पर्यावरण को कैसे प्रभावित करेगी।

कार्यक्रम का संचालन ऋतु चटर्जी ने किया। भारती जैन ने सत्र का सार प्रस्तुत किया, जबकि अनूप नौटियाल ने बताया कि रिस्पना–बिंदाल नॉलेज सीरीज़ आगे भी जारी रहेगी।

गौरतलब है कि इससे पहले सत्र में पुणे के नदी विशेषज्ञ सारंग यादवकर ने चेतावनी दी थी कि नदियों पर एलिवेटेड कॉरिडोर से देहरादून में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इस ऑनलाइन बैठक में देहरादून सिटीजन फोरम के 40 से अधिक स्थानीय सदस्य शामिल हुए।

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