राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) एवं विपक्षी प्रोपोगंडा

डीडी मित्तल

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत ग्राम से लेकर राज्यों तक राष्ट्रीय पहचान के लिए यह कार्य वर्ष 2003 से किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय पहचान, कार्यक्रमों हेतु डेटाबेस है जो वर्ष 2010 से किया जा रहा है। इसके बाद यही कार्यक्रम 2015 में सभी राज्यों में (असम को छोड़कर) चलाया गया एवं सितंबर 2020 तक होना है तथा अप्रैल 2021 में भारत की जनगणना 2021 एवं मकान सूचीकरण होगी।

यहां इस बात का उल्लेख करना बहुत आवश्यक है कि इस कार्यक्रम में मकान, परिवार एवं परिवार के सदस्यों के विवरण के साथ आवश्यक सुविधा का विवरण, पेयजल की उपलब्धता, प्रकाश व्यवस्था के साथ शौचालय स्नानघर के विवरण, रसोई गैस, मनोरंजन के साधन, इंटरनेट एवं यातायात के साधनों का विवरण लिया जाना है।

यह सभी सूचना राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों, योजनाओं के लिए आधार है और प्रत्येक देशों में यह कार्यवाही की जाती है। किंतु एक वर्ग विशेष जो आज समाज में अति पिछड़ा वर्ग में आता है को डराया जा रहा है या तथा भय पैदा किया जा रहा है कि कार्य मुस्लिमों को देश से बाहर करने की चाल है। यह पूर्ण भ्रम है, इसमें किसी को डरने की जरूरत नहीं है। एनपीआर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है इसमें सभी को सहयोग करना चाहिए।

राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर (NPR) एवं विपक्षी राजनीतिक प्रोपोगंडा-

आज अधिकांश विपक्ष एक सम्मलित आवाज में यहग भ्रान्ति फैलाने का प्रयास कर रहा है कि यह कार्यक्रम सरकार द्वारा एक जानी सुनी योजना के तहत लागू किया जा रहा है। इस तरह की भ्रांति का शिकार एक वर्ग विशेष हुआ भी है इसका प्रबल उदाहरण नागरिक संसोधन बिल में देखने को मिला जिसको बढ़ा चढ़ाकर एक वर्ग को सभी विपक्षी दलों ने वोट बैंक समझकर हवा दी और यह समझाया गया कि यह बिल वर्ग विशेष की नागरिकता छीनने की साजिश है।

CAB को NRC से भी जोड़ दिया और देश में ऐसी आग लगाई कि अभी तक बुझने का नाम नहीं ले रही इसमें एक हद तक सरकार भी जिम्मेदार है जब देश में गृह मंत्री ने लोकसभा NRC को लेकर बयान दिया था। इसी तारतम्य में यहां लिखना अतिसयोक्ति नहीं होगी कि हम यहां चर्चा कर रहे हैं यह समाज का वह वर्ग है जिसको सभी राजनीतिक दलों ने छला है लेकिन इस दल के नेताओं ने इनके साथ सबसे बड़ा विश्वासघात किया है।

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