“मिरुवा मौत मलूका शिकार”

महाकाल (शिव बाबा) ने अपनी दिव्य वाणियां जो मुरली के माध्यम से अपने बच्चों को सुनाई गयी है, में “मिरुवा मौत मलूका शिकार” का कई दफा जिक्र आया है, एवं सेंटर की बहिने इसका सही सही अर्थ भी बताती रही हैं किन्तु बच्चों के जहन* में निकल जाता है। कोविड -19 सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त है, इस वक्त शिव बाबा के उपरोक्त महावाक्य पूर्णत:, अक्षरशः सत्य हो रहे है एवं बाबा के बच्चों को यह समझ भी लेना चाहिए।

उपरोक्त वाक्यों से पहले आमजन को श्रीमत को समझना उचित है। “मिरुवा मौत मलूका शिकार” में मलू शिकारी को कहते हैं और मलूक को मिरवा कहते हैं, उस जानवर को जिसका शिकारी शिकार करता है, जब जानवर की मौत आती है (शिकार)तो उसको दुःख होता है किन्तु शिकारी को उसका शिकार मिल जाता है तो वह प्रसन हो जाता है, ऐसे ही जैसे जैसे पुरानी दुनिया से नयी दुनिया (कलयुग से सतयुग) में सृष्टि परिवर्तन की प्रक्रिया होती है तो पुरानी दुनिया खलास हो जाती है, इससे हाहाकार एवं आत्माओं को दुःख प्राप्त होता है क्योंकि यह आत्माएं शिवबाबा के ज्ञान से अनभिज्ञ होती है वहीँ बाबा के बच्चे जो ज्ञान में चल रहे है, देख देख कर खुश होते हैं क्यों की वे जानते है कि यह पुरानी दुनिया से नयी दुनिया बनने का यह बना बनाया प्रकृति का ड्रामा है, जो श्रीमत के अनुसार है। शिव बाबा के जो बच्चे ज्ञान में चलते है वे प्रकृति की इस उथल पुथल से तनिक भी विचलित नहीं होते।

– (डी डी मित्तल)

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