फांसी का फंदा तैयार !

देश में मोदी सरकार बेटियों के हित के में अनेक कानून लायी है एवं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे का भी काफी प्रचार किया है। किंतु बालात्कार की घटनाओं पर पूरा देश चिंतित है।

इस घिनोने अफराध के लिए कानून में फांसी का प्रावधान करने के बावजूद बलात्कारियों पर रोक नहीं लग पा रही है। इसका मुख्य कारण न्याय प्रणाली में देरी का होना है। देश की उच्चतम न्यायपालिका द्वारा आरोपियों को फांसी की सजा सुनाने के बाद भी 7 साल से वे फ्री हैं और उन्हें मृत्यु दंड अभी तक भी नहीं दिया जा सका है।

इस प्रकरण में आरोपी न्याय को ठेंगा दिखा रहे हैं लेकिन हैदराबाद के कातिलों का एनकाउंटर के बाद देश के मिजाज को देखते हुए शीघ्र ही निर्भया के कातिलों को फांसी की सजा की मांग की जा रही है।

अब कल अंतिम तौर पर न्यायालय इस केस की सुनवाई कर रहा है। उम्मीद है कि 24 घंटे के अंदर कातिलों को डेथवारंट निर्गत करने के आदेश जारी होंगे, देश की जनता भी यही चाहती है।

हालांकि कोर्ट उस मामले में 18 दिसम्बर को फैसला सुना सकती है जिसमे इन चारों आरोपियों को फांसी की सजा ना देने की अपील की गई है। अब देखना होगा कि कोर्ट आने वाले समय में क्या फैसला देती है। फिलहाल तो यही लगता है कि अदालत भी इस मामले में पहले ही कड़े शब्दों ने निंदा कर चुकी है ऐसे में आरोपियों का बच पाना मुश्किल लग रहा है ।

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