कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने आगामी कुंभ मेले के बारे में विस्तृत जानकारी दी

शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने आज मीडिया सेंटर सचिवालय में प्रेस वार्ता करते हुए आगामी कुम्भ मेले के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आगामी कुंभ मेले के सफल आयोजन हेतु प्रयासरत है। कुंभ का आयोजन निर्धारित समय अवधि में संपन्न हो इसके लिए सभी अखाड़ों की भी सहमति है।

कुंभ की व्यवस्थाओं के अंतर्गत किए जा रहे स्थाई प्रकृति के कार्यों को निर्धारित अवधि में पूर्ण करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हरिद्वार को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों, पुलों आदि के निर्माण, पुनर्निर्माण के कार्य प्रगति पर हैं।

राज्य सरकार सभी 13 अखाड़ों को उनके स्तर पर श्रद्धालुओं के लिए की जाने वाली आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु कुंभ मेला प्रयाग की भांति यथासंभव आर्थिक सहयोग दिए जाने पर विचार कर रही है। इससे अखाड़ों को जन सुविधाओं व मूलभूत सुविधाओं के विकास में सुविधा होगी।

जिन अखाड़ों के पास अपनी भूमि उपलब्ध होगी उन्हीं को अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु धनराशि उपलब्ध करायी जायेगी। अखाड़ों के अधीन होने वाले कार्यों के लिये कार्यदायी संस्था का भी निर्धारण शीघ्र किया जायेगा।

श्रावण माह में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कांवड़ मेले को कोविड-19 के दृष्टिगत स्थगित किया जा रहा है, इस संबंध में यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व हिमाचल के मुख्यमंत्रियों से मुख्यमंत्री की वार्ता हुई है। सभी ने वर्तमान संकट को ध्यान में रखते हुए इसके लिये सहमति जतायी है।

कांवड़ के दृष्टिगत पड़ोसी राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उप राज्यपालों एवं मंत्रिगणों के माध्यम से उनके प्रदेशों को गंगाजल उपलब्ध कराने का अभिनव प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा।

गंगाजल  के लिये हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को उनके समीप के प्रमुख मंदिरों में गंगा जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। प्रदेश सरकार द्वारा पीतल के बड़े कलशों में हर की पैड़ी से गंगा जल भरकर संबंधित प्रदेशों को उपलब्ध कराया जायेगा।

कुंभ मेले के स्थायी प्रकृति के कार्यों की व्यापक समीक्षा के लिये मुख्यमंत्री जी द्वारा नगर विकास मंत्री, सचिव शहरी विकास एवं मेलाधिकारी की समिति गठित की है। समिति द्वारा कार्यों की नियमित समीक्षा की जायेगी। कुंभ के अंतर्गत किये जाने वाले अस्थायी निर्माण कार्यों के सम्बन्ध में भी शीघ्र निर्णय लिया जायेगा।

गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी छड़ी यात्रा का संचालन किया जायेगा। इसमें सीमित लोगों द्वारा प्रतिभाग किया जायेगा। यह यात्रा उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक एकता की प्रतीक है। परम्परानुसार जूना अखाड़े से पवित्र छड़ी यमुनोत्री, गंगोत्री होते हुए केदारनाथ और बदरीनाथ जाती है। बद्रीनाथ से यह छड़ी कुमाऊं मंडल के विभिन्न तीर्थ स्थलों से होते हुए वापस जूना अखाड़ा हरिद्वार पहुंचेगी और माया देवी मंदिर में प्रतिष्ठित की जाती है।

हरिद्वार में चूंकि प्रति माह कोई न कोई आयोजन होता रहता है अतः अवस्थापना सुविधाओं के विकास से इसमें सुविधा होगी। हरिद्वार में आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों व आयोजनों में भले ही सीमित संख्या में श्रद्धालू आयें लेकिन आते जरूर हैं।

About The lifeline Today

View all posts by The lifeline Today →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *