बाबा की एक अनुभूति

डी.डी. मित्तल (लाइफलाइन टुडे) :– माउण्ट आबू में मुझे सपरिवार वर्ष 1990 में सर्वप्रथम जाने का अवसर मिला था। किंतु तब प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संबंध में धारणा थी कि मुख्यतः यह संस्था बहनों एवं माताओं के लिए है। कालांतर में मुझे कई आश्रम/संस्थाओं में जाने का अवसर भी मिला किंतु आत्मा एवं परमात्मा के संबंध में संभवतः इसी संस्था ने मेरी दिमाग की खिड़की को खोला।
देहरादून में गुडगॉव आने के पश्चात मैं अपने सहयुगल स्थानीय सेंटर में जाते हैं एवं क्लास में अनेकों प्रसंग भी देखे गये जब बाबा की मुरली में कुछ बिंदुओं पर असपष्टटा प्रकट होती है एवं उक्त का निराकरण बाबा की मुरलियों में ही प्राप्त होता है। किंतु 18 नवंबर 2018 की मुरली के दौरान बाबा की वाणी एवं भाषा को लेकर यह चर्चा हुई कि ब्रह्माकुमारी संस्था आज विश्व में 146 देशों में है जहां हर जगह की भाषा भिन्न है जबकि ब्रह्मा बाबा की भाषा हिंदी में ही क्यों है। चर्चा होने पर सेंटर की बहन ने स्थिति साफ करने का प्रयास किया किंतु 19 नवंबर 2018 की मुरली को देखकर सभी की आंखों में आंसू आ गये जब बाबा ने अपनी मुरली में कहा तुम कहते हो बाबा अंग्रेजी नहीं जानते। बाबा कहते हैं मैं कहां तक सब भाषाओं में बोलूंगा। मुख्य है ही हिंदी तो मैं हिंदी में ही चलाता हूं जिसका शरीर धारण किया है वह भी हिंदी जानता है। तो इनकी भाषा है वही तो बोलता हूं।
बाबा के उक्त वचनों को मुरली में सुनकर हम सभी धन्य हैं एवं बाबा का स्नेह यह दर्शाता है कि हमेशा अपने बच्चों के साथ है।

About The Lifeline Today

View all posts by The Lifeline Today →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *