ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन ने प्रधान मंत्री को पत्र लिख कर करी आर्थिक पैकेज की मांग। कहा लघु एवं मझोले समाचार पत्रों की आर्थिक स्तिथि है गंभीर।

नई दिल्ली 25 अप्रैल :ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अखबारों को बचाने के लिए आर्थिक पैकेज दिये जाने की मांग की है। गुरिन्दर सिंह ने लघु और मझोले अखबारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री को पत्रकारों की आर्थिक स्थिति सुधरने के लिए लिखा पत्र।

गुरिन्दर सिंह ने लिखा – प्रधानमंत्री जी, बीते 5 वर्षों में मंदी के कारण मीडिया जगत में भारी संख्या में छटनी जैसा कदम कई मीडिया घरानों के द्वारा उठाया गया। इनमे प्रिंट और इलेक्ट्रानिक दोनों ही तरह के मीडिया घराने शामिल है, जहां हजारों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। वर्ष 2018-19 में (प्रैस ट्रस्ट ऑफ इंडिया) PTI से भी काफी लोगों को नौकरी से हटाया गया, जबकि(यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया) UNI की हालत अब भी खराब है। यूएनआई में पत्रकारों का वेतन करीब चार वर्ष(44 माह) का लम्बित है। इसी तरह कई प्रतिष्ठित बड़े समाचार पत्र समूह में भी पत्रकारों को नौकरी से हटाया जा चुका है। बीते तीन वर्षो की अगर बात करें तो भारत में प्रिंट मीडिया की विकास दर अपेक्षाकृत बेहद कम रही है। बीते पांच वर्ष में कोई नया समाचार पत्र समूह भारत में उभर कर सामने नहीं आया है। इसके अलावा देश की रीढ़ के रूप में कार्य करते हुए आम जन तक पहुंच रखने वाले लघु और मझौले समाचार पत्रों की विकास दर थमी हुई है और बहुत से अखबार वित्तीय संकट के कारण बंदी के कगार पर है।

गुरिन्दर सिंह ने बताया कोरोना से निपटने के उपाय के क्रम में सरकार द्वारा की गई तालाबंदी का बड़ाअसर देश के मीडिया जगत पर भी पड़ रहा है। देश के लघु और मझौले अखबारों पर तालाबंदी का असर सर्वाधिक है। सरकारी विज्ञापन लघु और मझौले अखबारों के लिए आय का प्रमुख स्रोत होता है, जो बीते कई वर्षों से प्रभावित है। एक अनुमान के मुताबिक एक लघु समाचार पत्र प्रकाशन जनपद में 10 से 15 और मध्यम समाचार पत्र प्रकाशन जनपद में 20 से 30 लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाता है। इस प्रकार लघु एवं मझौले अखबारों से देश भर में करोड़ों लोग रोजगार से जुड़े है।

मीडिया के लिए, खास तौर पर लघु एवं मझौले अखबारों के लिए सरकारों द्वारा जारी किया जाने वाला विज्ञापन केवल प्रचार का माध्यम मात्र नहीं है। विज्ञापन से मिलने वाली आय मीडिया से जुड़े लोगों के लिए रोजगार का एक बड़ा साधन है। विज्ञापन के बंद होने अथवा कम किए जाने पर लघु एवं मझौले अखबारों समेत मीडिया जगत से जुड़े घराने को भी छटनी करने पर विवश होना पड़ेगा। ऐसे में देश की बेरोगजारी दर में और अधिक वृद्धि होगी। लघु व मझोले समाचार पत्रों को विज्ञापन के अभाव में बंदी से बचाने के लिए आर्थिक पैकेज देने, विज्ञापनों में बढ़ोत्तरी करने ओर इनमें कार्यरत मीडिया कर्मियों को जीवन सुरक्षा आदि देने के प्रयास किए जाने की जरूरत है।

ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूज पेपर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरिन्दर सिंह ने ध्यान इस विषय पर आकर्षित कराना हेतु बताया।

अत: ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूज पेपर्स फेडरेशन आपसे मीडिया जगत के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रकाशकों और पत्रकारों के हित में निम्न अनुरोध करता है:-

1. लॉक डाउन व अन्य कारणों से अखबारों को हुए नुकसान और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्मॉल एडं मीडियम न्यूज पेपर्स के लिए आरक्षित फंड की स्थापना करी जाए।

2. सरकार द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए निर्धारित बजट को बढ़ाया जाए।

3. लघु एवं मझौले समाचार पत्रोंको संलग्न विधिके अनुसार वर्ष में अनुपात के आधार पर विज्ञापन जारी किए जाएं।

4. लघु और मझौले अखबारों को Micro, Small & Medium Enterprises की तर्ज पर सभी सुविधा उपलब्ध कराई जाए और विज्ञापनों में वरीयता दी जाए।

5. अखबारों, चैनलों और समाचार एजेंसियों में कार्य करने वाले संपादक, संवाददाताओं, छाया कारों व अन्य कर्मचारियों के लिए 50-50 लाख रुपए का बीमा कराया जाए।

6. देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसियों को बचाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाए ।

7. केबिनेट सचिव और सूचना प्रसारण मंत्रालय के उन आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाए जिनमे सभी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य के विज्ञापन डी ए वी पी के माध्यम से जारी कराने को अनिवार्य बनाया गया है।

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