सीएम धामी ने दशहरा महोत्सव में दिया सत्य और धर्म का संदेश, बोले- अंत में जीत अच्छाई की ही होती है

हिंदू नेशनल कॉलेज और परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रमों में की शिरकत, बोले- अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित, न्याय और सुशासन ही रामराज्य की मूल भावना

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजयादशमी के अवसर पर देहरादून में आयोजित दशहरा कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री लक्ष्मण चौक वेलफेयर सोसाइटी की ओर से हिंदू नेशनल कॉलेज में आयोजित रावण दहन एवं दशहरा मेले में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने परेड ग्राउंड में बन्नू बिरादरी की ओर से आयोजित दशहरा महोत्सव में भी शिरकत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देते हुए लोगों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास सहित आयोजन समितियों के पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है, जो सत्य, धर्म और न्याय की स्थापना का संदेश देता है। भगवान श्रीराम और रावण का प्रसंग हमें सिखाता है कि अहंकार और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। रावण के पास अपार संपत्ति, सामर्थ्य और विशाल सेना होने के बावजूद उसका अहंकार और मर्यादा का उल्लंघन उसके पतन का कारण बना। वहीं, भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, संयम, कर्तव्यनिष्ठा, करुणा और मर्यादा का अनुपम उदाहरण है।

सीएम धामी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए राजसुख त्यागकर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। उनका जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का अवसर भी है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार, अन्याय, नशे और महिलाओं के प्रति हिंसा जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामराज्य की अवधारणा न्याय, सुशासन, समानता और जनकल्याण पर आधारित है। सरकार का उद्देश्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक को न्याय मिले, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों, महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मिले और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक सौहार्द का संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

सीएम धामी ने प्रदेश में सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए चलाए गए अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है। सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने के उद्देश्य से सख्त दंगारोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करना समानता और न्याय की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार प्रदेश में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर कहा कि प्रदेश के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। नकल जैसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां मिली हैं। सरकार युवाओं को उनकी योग्यता और प्रतिभा के आधार पर आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।

सीएम धामी ने कहा कि सुशासन का आधार पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता है। राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम कर रही है। प्रदेश की आर्थिक प्रगति के लिए निवेश, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों का विस्तार आवश्यक है। स्थानीय व्यापारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। विकास के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक परंपराओं और प्राकृतिक विरासत का संरक्षण भी जरूरी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से विजयादशमी के अवसर पर सत्य, धर्म, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने तथा समाज में सद्भाव और नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाने का संकल्प लेने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने दोनों आयोजनों से जुड़े आयोजकों और पदाधिकारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि दशहरा मेले जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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