प्रदेश के पलायन की जद में आ चुके 474 गांवों को कल्याणकारी योजनाओं से दोबारा किया जाएगा आबाद

देहरादून– उत्तराखंड के पर्वतीय और सीमांत जिलों में पलायन एक बढ़ी समस्या बन गई है। अब इस समस्या से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने अपनी कमर कस ली है।  अब  50 फीसद तक पलायन की जद में आ चुके 474 गांवों को कल्याणकारी योजनाओं से सरसब्ज कर दोबारा आबाद किया जाएगा। इसे पहले पलायन रोकने को आधारभूत सर्वे के जरिये रिसोर्स मैपिंग होगी।

मुख्य सचिव ने उत्तराखंड  में पलायन से निपटने के लिए तीन वर्षीय कार्ययोजना तैयार करने का आदेश  जारी किया है। इन वर्षों में चिह्नित गांवों की तस्वीर बदलने को आजीविका, रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत संरचनाओं की जरूरत को पूरा किया जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश के पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन थामने को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल किया है। बीती 23 जनवरी को पलायन की गंभीर होती समस्या के निदान के उपायों पर चर्चा के लिए  मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नीति आयोग के उपाध्यक्ष की मौजूदगी में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक के फैसलों पर अमल को मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों के साथ ही सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी किया है। इस आदेश में ग्राम्य विकास व पलायन आयोग के सर्वे में चिह्नित 474 गांवो में पलायन रोकने की रणनीति तैयार करने की हिदायत दी गई है।

जिसके तहत पहले चरण में अति पलायन प्रभावित 245 गांवों के लिए सघन रणनीति बनाई जाएगी। चिह्नित गांवों के लिए बहुआयामी कार्ययोजना तैयार कर केंद्रपोषित, राज्यपोषित, बाह्य सहायतित योजनाएं कारगर तरीके से लागू की जाएंगी। इसी के साथ आजीविका, रोजगार, किसानों की आय दोगुनी करने समेत तमाम जरूरी सूचनाएं तीन प्रारूपों पर जुटाई जाएंगी। इसके बाद शासन, मंडल और जिला स्तर पर योजनाओं को जमीन पर उतारने का प्लान बनेगा। जिलाधिकारी 25 फरवरी तक कार्ययोजना को अंतिम रूप देंगे। इसके एक माह बाद कार्ययोजना को जमीन पर साकार किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *